Rewa News: रीवा का श्यामशाह मेडिकल कॉलेज अचानक चर्चाओं में आ गया है। बीएससी नर्सिंग सेकंड‑ईयर की लगभग 80 छात्राएँ एक‑साथ सामने आईं और ईएनटी विभाग के सीनियर डॉक्टर मोहम्मद अशरफ़ अली पर छेड़खानी व लगातार ‘लेग‑पुलिंग’ जैसी हरकतें करने का आरोप लगा डाला। कह सकते हैं कि कॉलेज की गलियारों से निकलकर यह मामले ने पूरे शहर का ध्यान खींच लिया। चलिए, इसे विस्तार से जानते हैं आखिर क्या है मामला?
शुरू कैसे हुआ पूरा किस्सा?

छात्राएँ रोज़ की तरह क्लिनिकल प्रैक्टिस के लिए श्यामशाह मेडिकल कॉलेज जा रही थीं। वहीं, कई दिनों से उन्हें लग रहा था कि डॉक्टर साहब का व्यवहार ठीक नहीं है कभी फब्ती, कभी बेइज़्ज़ती‑भरी बातें। धीरे‑धीरे असहजता डर में बदलने लगी, फिर गुस्सा उबल पड़ा। एक दिन सबने तय किया, “बस अब और नहीं!” और रीवा मेडिकल कॉलेज की सभी 80 छात्राएँ एक ही सुर में प्रिंसिपल के पास पहुँच गईं।
शिकायत दर्ज, कॉलेज के भीतर खलबली
फिर क्या था, कॉलेज‑प्रशासन के होश उड़ गए, प्रिंसिपल ने तुरंत हॉस्पिटल प्रैक्टिस पर रोक लगा दी और जाँच कमेटी बना दी। उधर नर्सिंग स्टाफ, जूनियर डॉक्टर और ABVP तक मैदान में आ गए – “बेटियों के साथ नाइंसाफ़ी बिल्कुल नहीं चलेगी!” के नारे लगाए जाने लगे।
डॉक्टर अशरफ़ का जवाब काम न आया
कमेटी ने डॉक्टर मोहम्मद अशरफ़ अली से सफ़ाई माँगी, पर उनकी बातों में संतोष वाला कुछ था ही नहीं। छात्राएँ डटी रहीं कि उन्होंने अपमानजनक टिप्पणियाँ कीं, पेशे की मर्यादा तोड़ी और सबको असुरक्षित महसूस कराया।
डीन का ताबड़तोड़ एक्शन
रीवा मेडिकल कॉलेज डीन डॉ. सुनील अग्रवाल ने देर न लगाई और जाँच रिपोर्ट पर नज़र मारते ही उन्होंने डॉक्टर अली को तत्काल सस्पेंड कर दिया। आदेश निकलते ही हॉस्पिटल‑कैंपस में खबर आग की तरह फैल गई और लोग कह रहे हैं -“देखो, कार्रवाई हो गई!”
शहर की हवा बदली, पर सवाल बचे हैं
हालाँकि सस्पेंशन से छात्राओं को थोड़ी राहत मिली, मगर सबके मन में यही सवाल है कि आगे क्या? क्या मेडिकल कॉलेजों में लड़कियाँ बेख़ौफ़ सीख‑सिखा पाएँगी? कॉलेज प्रशासन को अब भरोसा लौटाना होगा, ताकि पढ़ाई का माहौल फिर से सामान्य हो सके।
आख़िर में
इस पूरी घटना ने साफ़ कर दिया कि जब आवाज़ें एक‑जुट हो जाती हैं तो बदलाव टाला नहीं जा सकता। 80 बेटियों की हिम्मत ने बता दिया कि “डॉक्टर” जैसे बड़े ताज के पीछे भी अगर गलत हरकत है, तो एक झटके में रुतबा उतर सकता है। उम्मीद है आने वाले दिनों में ऐसे मामलों को सिर उठाने का मौका ही न मिले, और अगर कभी हों, तो सच सामने लाने के लिए फिर किसी को हिचकिचाना न पड़े।
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