आपने कभी सोचा है कि हमारे गांव के सरपंच को हर महीने कितनी सैलरी मिलती होगी? गांव में तो लोग अक्सर कहते हैं कि “सरपंच तो सरकार वाला आदमी है, खूब कमाता होगा।” लेकिन असली सच्चाई कुछ अलग ही है। चलिए आज इसी बारे में थोड़ा दिल से और आसान भाषा में बात करते हैं।
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सरपंच होता कौन है आखिर?
सरपंच को आप गांव का मुखिया समझ लीजिए। वही जो पंचायत बैठकों में सबसे आगे बैठता है, फैसले सुनाता है और सरकारी योजनाओं की बात करता है। ये भी गांव के लोगों द्वारा चुना गया नेता होता है। मतलब जनता ही उसे वोट देकर चुनती है। उसका काम पांच साल तक गांव की जिम्मेदारी संभालना होता है, चाहे सड़क बनवानी हो, पानी का इंतजाम करना हो या कोई झगड़ा सुलझाना हो।
सरपंच की सैलरी कितनी होती है?
अब बात आती है पैसे की। असल में सरपंच की सैलरी हर राज्य में अलग-अलग होती है। कोई फिक्स रेट नहीं है। कुछ राज्यों में तो नाममात्र का मानदेय दिया जाता है, और कहीं-कहीं थोड़ा अच्छा भत्ता भी।
जैसे कि उत्तर प्रदेश में करीब 3 से 3.5 हजार रुपए तक मिलते हैं। मध्य प्रदेश में थोड़ा ज्यादा, करीब 4 से 5 हजार तक। राजस्थान में ये 6 हजार के आसपास है, जबकि हरियाणा और गुजरात जैसे राज्यों में 8 से 10 हजार तक पहुंच जाती है। महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में तो कुछ जगह 10 हजार तक भी सरपंचों को मिल जाता है।
नीचे कुछ राज्यों के सरपंचों की औसत सैलरी दी गई है:
| राज्य | सरपंच की मासिक सैलरी (लगभग) |
|---|---|
| उत्तर प्रदेश | ₹3,000 से ₹3,500 मानदेय + भत्ता |
| मध्य प्रदेश | ₹4,000 से ₹5,000 प्रतिमाह |
| राजस्थान | ₹6,000 प्रतिमाह |
| बिहार | ₹3,000 प्रतिमाह |
| महाराष्ट्र | ₹5,000 से ₹7,000 प्रतिमाह |
| छत्तीसगढ़ | ₹6,000 से ₹10,000 प्रतिमाह |
| हरियाणा | ₹8,000 से ₹12,000 प्रतिमाह |
| गुजरात | ₹7,000 से ₹10,000 प्रतिमाह |
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क्या सरपंच की सैलरी बढ़ सकती है?

जी हां, कई बार सरकारें सरपंचों का मानदेय बढ़ा देती हैं। जैसे राजस्थान में कुछ समय पहले सैलरी 3,500 से बढ़ाकर 6,000 कर दी गई थी। धीरे-धीरे हर राज्य में ऐसा होता रहता है। पर अभी भी ये रकम उतनी नहीं है जितनी जिम्मेदारी के मुकाबले होनी चाहिए।
निष्कर्ष
सरपंच की सैलरी भले ही बहुत बड़ी नहीं लगती, लेकिन उसका पद बहुत बड़ा होता है। वो गांव की नींव है, वहां की आवाज है। उसके फैसले से कई लोगों की जिंदगी बदल सकती है। इसलिए जब अगली बार आप अपने सरपंच से मिलें, तो सोचिए, वो भी आपकी तरह एक इंसान है, जो पूरे गांव की जिम्मेदारी अपने कंधे पर उठाए बैठा है।


